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कदर

कदर करना भी किसी कि बहोत बडी जिम्मेदारी है,वह निभाए तो एहसाँ तुम निभाओ तो दुनियादारी है! भूल वह जायें अगर तो उनको कोई ऐतराज़ नही है,तुम जरा ठ़हर जाओ अगर तो बहोत बडी बेईमानी है! वह कहे अगर तो उनका हर लफ्ज़ सर आँखो पर,तुम सुनाओ कुछ भी अगर तो बात बडी आसमानी है!पढ़ना जारी रखें “कदर”

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ग़ज़ल: क़म ही लगता है!

क़म ही लगता है जो भी मिला हर किसी को तक़दीर में,पास जिनके है सब उनको भी ले चला खुदा आखिर में! ग़म ए जिंदगी का पिना होगा जिनको मिला ए नसीब से,क्या फ़र्क है जो छिन कर लेता है तुझमें और क़ातिल में! दम धरना सीख लो यहाँ पर यह जरा सी तो जिंदगीपढ़ना जारी रखें “ग़ज़ल: क़म ही लगता है!”