ज़प्त ए दिल

ज़प्त ए दिल किया हैं उसी ने जज्बात में आकर, सितारों अब तो लौटा दो चाँद हाथों में आकर! मेरी मर्जी के बिना ही जाने उसने क्या क्या लूटा, हम मना भी न कर सकें उनकी बातों में आकर! ऐ हवाओं न चलों ऐसा के ख़ुशबू में बहक जायें, मेरे हाथों को वह छू करपढ़ना जारी रखें “ज़प्त ए दिल”

हमनें ऐ जिंदगी

हमनें जिंदगी तेरा ख़ुद से बेहतर ख़याल किया, टूट कर हम बिख़र गयें और तुमने बवाल किया! रुख़ हवा का छोड़ कर हम मुड़ गयें तेरी तरफ़, हार गये हम चलते चलते रास्तों ने कमाल किया! जाने अन्जाने से हैं पहलु फैले हुए हर तरफ़, तेरी चाहत में गुम हुये और तुमने सवाल किया! जितनेपढ़ना जारी रखें “हमनें ऐ जिंदगी”

arushi_india

मुझे मंजिल तो आतीं हैं नज़र मगर चलूँ तो भी कैसे, ख़्वाहिश है जिसे पाने की हासिल करूँ तो भी कैसे! झाँककर खिड़कीसे हर वक्त़ हर फूल देखता है मुझे, बड़ा हूँ फ़िर भी बच्चा हूँ मैं बहक जाऊँ तो भी कैसे! घर का हर आदमी सुबह मुस्कुराता हुआ निकलता है, रूह से ही पूछोंपढ़ना जारी रखें “arushi_india”

पूछो

कभी हँसने का कोई मुझको मतलब तो पूछो, दिल में छुपाये हैं दर्द़ कितने आज तक पूछो! शाम आहिस्ता आहिस्ता सरहद़ पर चलती हैं, हमनें देखा है हँसीन ए जवान माहताब़ पूछो! मेरी सांसों में बसी है अभी तक उनकीं खुशबू, इन फिज़ा ओं को मिलेगा वक्त़ जब तब पूछो! हर किसी को नहीं होतींपढ़ना जारी रखें “पूछो”

पूछो

कभी हँसने का कोई मुझको मतलब तो पूछो, दिल में छुपाये हैं दर्द़ कितने आज तक पूछो! शाम आहिस्ता आहिस्ता सरहद़ पर चलती हैं, हमनें देखा है हँसीन ए जवान माहताब़ पूछो! मेरी सांसों में बसी है अभी तक उनकीं खुशबू, इन फिज़ा ओं को मिलेगा वक्त़ जब तब पूछो! हर किसी को नहीं होतींपढ़ना जारी रखें “पूछो”

Absence कहाँ

जो नहीं होते हैं उनकीं हर वह बात करते हैं, सामने रख कर आईना मुलाकात करते हैं! वह ख़ामोश छत पर मिलता है कभी कभी, न जाने क्यूँ हर एक दिन हम रात करते हैं! जो बस में नहीं उसे पाने की तमन्ना रखते है, लोग सुनते हैं कम जादा सवालात करते हैं! दोस्ती वहपढ़ना जारी रखें “Absence कहाँ”

कोशिश ए ग़ज़ल

कोशिश करते करते अब हम ख़ुद से हार गये हैं, हम ही नही है अकेले शहर से कुछ और गयें हैं! दिल धड़कने का सबब क्या मिला के क्या बतायें, हर हाल में बात करते करते कुछ बिमार गयें हैं! हम थे तो बहोत ख़ुश घर में उनके आने से पहले, कुछ ज़रूरी होता नहींपढ़ना जारी रखें “कोशिश ए ग़ज़ल”

तेरी नज़दीकीयाँ : गीत

तेरी नज़दीकीयाँ मुझको तुझसे दूर करने लगीं हैं, ख्व़ाबो ख़यालों की यह मजबूरियाँ बढने लगीं हैं! जब पास होते हो तुम तो दिल ए धड़कता हैं मेरा, मेरे जिस्म की यह आहोशीयाँ भी भड़कने लगीं हैं! हो ना हो तुम मेरे साथ यूँ उम्र भर फ़िर भी मगर, यह दूरियाँ भी कुछ हद तक मगरपढ़ना जारी रखें “तेरी नज़दीकीयाँ : गीत”

इश्क़ भी क्या है

यह कैसे होता हैं कौन जाने दिल में दर्द़ सा होता हैं, धीरे धीरे आँखों की झ़ील में हम जर्फ़ सा होता हैं! तुम सामने आते हो जब यह नज़र कहीं जातीं नहीं, आँखों से बयाँ करतें हो पर अंग़ार ए बर्फ़ सा होता हैं! एक चाहत तेरी आहट है जैसे सूरज की पहली किरण,पढ़ना जारी रखें “इश्क़ भी क्या है”

मैं कुछ

तुम्हारी झ़ील सी आँखों में कुछ इस तरह खोया हुआ हूँ, किसी ख़याल ने छुआ नहीं कुछ इस तरह सोया हुआ हूँ! जख़्म ए दिल से आह भी न निकले इश्क़ ए चीज़ क्या हैं, बिखरे हुए मोती समेटकर मैं कुछ इस तरह रोया हुआ हूँ! हर फ़िज़ा में हर तरफ़ से आतीं हैं सौंधीपढ़ना जारी रखें “मैं कुछ”

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