दिल कि अदालत

तुझको मिलने की मुझको मिलीं इजाज़त भी क्या हैं, जिसने सुनाई सजा मरने की वह अदालत भी क्या हैं! जिनके तलबग़ार थे ऐ झ़ील अगर वह नहीं तो क्या है, उम्र भर माँगी दुवायें ख़ुदा से यह इबाद़त भी क्या है! है फ़ुरसत कहाँ वक्त़ को आजकल अपनों के ख़ातिर, बहोत हँसीन हैं मगर फ़िर […]

Romance

लगीं ठ़ोकर मुझको तब जाकर कहीं अक़्ल आई हैं, कर दी नुमाईश आईने की तो कहीं शक़्ल आई है! हमनें कर दी जब शिकायत जाहिर ख़ुदा से दोस्तों, मेहमान ए नवाजी में तब कहीं हर दख़्ल आई है! देखते देखते चुप के से हर रंग सारे उनके चुराये हैं, तब कहीं मुझको उनकी हुब हुब […]

क्यूँ न जाने

हमनें देखीं वह निगाहें खोई खोई क्यूँ न जाने, तसवीर दिल के आईने में सजाई क्यूँ न जाने! बाद यह मुद्दतें मिला कोई ऐसा जख़्म मुझको, बिन पूछे ही मिला हैं ऐसा सौदाई क्यूँ न जाने! हमनें माँगी थी दुवाएँ रात दिन जिनके ख़ातिर, मिलने के पहले मिली यह जुदाई क्यूँ न जाने! हमनें उनकों […]

जरा जरा सा

जरा जरा सा चाँद मुड़ के देख लेता कभी तो, जो हमनें दिया है दिल आज़मा लेता कभी तो! हम उम्र भर ए अब इंतज़ार तेरा तो कर ही लेंगे, जरा जरा सा उतर कर जमीन पे आता कभी तो! तु क्यूँ हैं इतना ख़ामोश ए दिल बताओं तो सही, तु देकर मुझको आँसू तेरे […]

सृष्टि का नियम

हरे पत्तों का रंग वक्त़ के साथ साथ बदलते हुए देखा है, हमनें भी हर ख्व़ाब ए ख़यालों को बिख़रते हुए देखा है! जितने भी आये जमाने कुछ कर दिखाने की उम्मीद से, किया बहोत शराफ़त से उनकों भी गुज़रते हुए देखा है! चाँद और सूरज ने मोहब्बत को मिल बाँट के जिंदा रखा, हर […]

जख़्म मज़हबी

सर से ज़मीन बढ़ गयी फ़िर भी कुछ न सीख़ा हमनें, ऊँगलियाँ उठ़ाते रहें जन्नत में कुछ भी न देखा हमनें! आँखों से अपनी अगर कुछ शराफ़त भर कर लेता, गिर कर अब ख़ुदा की नज़र से गँवाया मौक़ा हमनें! सख़्त हैं वह कहते कहते उनसे उम्र भर दूर रह गयें, जिस ने बनाया था […]

सर्वसाधारण

काश़ होता यह सफ़र आसान तो तेरे नाम सा होता, धूप है सहरा है यह जिंदगी फ़िर भी छाँव सा होता! लेकर के हम जख़्म सारे निकलते हैं हर रोज़ घर से, वह माथे का चढ़ता सूरज हर दोपहर चाँद सा होता! रात ख़ामोश हैं यह तो अब हैं सिर्फ़ कहने के लिए, चारों दीवारें […]

भूली बिसरी कहानी

भरी रात बरसात में दिल दिल से मिल गया, एक चिंगारी क्या लगीं सारा शहर जल गया, वह अदा ही क्या हँसीन हैं हर कोई दीवाना, दूर ही था बला से मगर कैसा जादू चल गया! वह चाँद जमीन पे था जो मुझे लूट कर गया, इसी बिस्तर पर था सुबह कैसे निकल गया! मैं […]

प्यास

दिन में सितारों को बुलाने वाले, क्या लिखूँ रात को जगाने वाले! इतनी ख़ामोशी अब तक न थी, जिंदगी ए जिंदगी बदलने वाले! चला ही जाता मैं इस शहर से, नाम इस दिल पे लिखने वाले! क्या करूँ मैं किस तरफ़ देखूँ, ख़ुशबू हवाओं में मिलाने वाले! चर्चा अपना सारे आम हुआ है, यह चेहरा […]

अक्स

मैं चला जाता हूँ जहाँ जहाँ तेरा अक़्स दिखाई देता है, छुपा लूँ जमाने से मैं कितना भी जख़्म दिखाई देता है! हम अपने दोस्तों को मिलनें चलें जाये क्यूँ बताओं तो, चुप ही होते हैं पर होठोंपे उनकी बज़्म दिखाई देता है! आईना है जैसा बना दिया है हमनें अपना घर लेकिन, जब भी […]

Create your website at WordPress.com
Get started